हिसार का बदलता चेहरा: एयरपोर्ट से ‘एयरोस्पेस हब’ तक, यहाँ मिलेंगी 10,000+ नई नौकरियां!
2026 में हिसार अब केवल खेती या स्टील का केंद्र नहीं रहा, यह भारत का उभरता हुआ ‘एयरोस्पेस और डिफेंस हब’ बन चुका है। महाराजा अग्रसेन इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास 3000 एकड़ में विकसित हो रहा “इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (IMC)” हजारों नौकरियों का नया ठिकाना बन गया है।
1. क्या है यह ‘एयरोस्पेस और डिफेंस हब’?
यह एक विशेष औद्योगिक क्षेत्र है जिसे हरियाणा सरकार ने एयरपोर्ट के ठीक बगल में विकसित किया है। इसका मुख्य उद्देश्य एयरक्राफ्ट पार्ट्स बनाना, ड्रोन टेक्नोलॉजी विकसित करना और डिफेंस इक्विपमेंट्स की मैन्युफैक्चरिंग करना है। यहाँ कुछ मुख्य आकर्षण ये हैं:
- एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO): यह हवाई जहाजों की सर्विसिंग और रिपेयरिंग का बड़ा केंद्र होगा।
- ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग: कृषि, सर्विलांस और लॉजिस्टिक्स के लिए ड्रोन बनाने वाली कंपनियां यहाँ आ रही हैं।
- डिफेंस कंपोनेंट यूनिट्स: सेना के लिए छोटे पुर्जे और इक्विपमेंट्स बनाने वाली फैक्ट्रियां भी यहाँ लगेंगी।
2. कौन सी कंपनियां आ रही हैं और कितनी नौकरियां मिलेंगी?
हरियाणा सरकार के अनुसार, पहले चरण में ₹5,000 करोड़ से अधिक का निवेश आने की उम्मीद है। कुछ प्रमुख कंपनियों ने अपनी यूनिट्स लगाने की घोषणा की है, जैसे:
- Alpha Aviation: एयरक्राफ्ट पार्ट्स की असेंबली यूनिट।
- Drone Solutions India: अत्याधुनिक ड्रोन निर्माण इकाई।
- Tech Aero: MRO और एविएशन ट्रेनिंग सेंटर।
अनुमान है कि अगले 3-5 सालों में यहाँ सीधी 10,000 से ज्यादा और अप्रत्यक्ष रूप से 20,000+ नौकरियां पैदा होंगी।
3. किस तरह की नौकरियां मिलेंगी? (Skills in Demand)
यह सिर्फ इंजीनियर्स के लिए नहीं है, यहाँ हर स्ट्रीम के युवाओं के लिए अवसर हैं:
- एविएशन सेक्टर: एयरक्राफ्ट टेक्नीशियन, MRO इंजीनियर, ग्राउंड स्टाफ, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर।
- मैन्युफैक्चरिंग: प्रोडक्शन इंजीनियर, क्वालिटी कंट्रोलर, स्किल्ड लेबर (फिटर, वेल्डर), रोबोटिक्स ऑपरेटर।
- ड्रोन टेक्नोलॉजी: ड्रोन पायलट, सॉफ्टवेयर डेवलपर, डेटा एनालिस्ट, रिसर्च एंड डेवलपमेंट।
- सपोर्ट रोल्स: लॉजिस्टिक्स मैनेजर, सप्लाई चेन एक्सपर्ट, एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ, फाइनेंस और एचआर (HR)।
4. तैयारी कैसे करें? (Education & Training)
हिसार में अब इन नौकरियों के लिए विशेष ट्रेनिंग भी मिल रही है:
- महाराजा अग्रसेन एविएशन एकेडमी: एयरपोर्ट के पास ही MRO और एविएशन मैनेजमेंट के कोर्स शुरू कर रहा है।
- GJUST (गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी): एयरोस्पेस इंजीनियरिंग और डेटा साइंस में नए डिप्लोमा और डिग्री प्रोग्राम।
- ITI Hisar: एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस और रोबोटिक्स के लिए शॉर्ट-टर्म सर्टिफिकेट कोर्स।
5. हिसार के लिए यह क्यों ‘गेम चेंजर’ है?
- आर्थिक विकास: शहर की जीडीपी (GDP) में बड़ा उछाल।
- विश्वसनीयता: हिसार अब वैश्विक मानचित्र पर एक औद्योगिक केंद्र के रूप में उभरेगा।
- पलायन में कमी: युवाओं को नौकरी के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
- इंफ्रास्ट्रक्चर विकास: सड़क, बिजली, पानी और आवास में सुधार।


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