हिसार-दिल्ली कनेक्टिविटी: 2030 तक का भविष्य
वर्तमान में हिसार से दिल्ली जाने में सड़क मार्ग से लगभग 3.5 से 4 घंटे लगते हैं। भविष्य के इन प्रोजेक्ट्स का लक्ष्य इस समय को घटाकर 90 मिनट से भी कम करना है।
1. दिल्ली-हिसार RRTS (रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम)
केंद्र और राज्य सरकार की योजना के अनुसार, दिल्ली-रोहतक-हिसार कॉरिडोर को रैपिड रेल नेटवर्क से जोड़ने पर विचार चल रहा है।
- रफ्तार: 160-180 किमी/घंटा।
- फायदा: यह ट्रेन मेट्रो की तरह ही बार-बार मिलेगी लेकिन इसकी गति बहुत अधिक होगी। यह मुख्य रूप से उन लोगों के लिए वरदान होगी जो काम के सिलसिले में दिल्ली अप-डाउन करते हैं।
2. हाई-स्पीड पैसेंजर ट्रेन और ट्रैक अपग्रेडेशन
रेलवे मंत्रालय हिसार-रोहतक-दिल्ली रूट पर पटरियों की क्षमता (Track Capacity) बढ़ाने पर काम कर रहा है।
- वंदे भारत एक्सप्रेस: उम्मीद है कि 2026-27 तक हिसार को अपनी समर्पित वंदे भारत ट्रेन मिल जाएगी, जो दिल्ली तक का सफर बेहद आरामदायक और तेज बना देगी।
- ऑर्बिट रेल कॉरिडोर: हरियाणा ऑर्बिट रेल कॉरिडोर भी हिसार के आसपास के क्षेत्रों को कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) के साथ जोड़कर दिल्ली बाईपास कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।
इस कनेक्टिविटी से होने वाले 5 बड़े बदलाव
| क्षेत्र | प्रभाव (Impact) |
| रियल एस्टेट | दिल्ली के करीब होने के कारण हिसार में प्रॉपर्टी के दाम 2x से 3x तक बढ़ सकते हैं। |
| रोजगार | लोग हिसार में रहकर दिल्ली में नौकरी कर सकेंगे (Seamless Commute)। |
| व्यापार | हिसार के स्टील और गारमेंट उद्योग को दिल्ली की मंडियों तक सीधी और तेज पहुंच मिलेगी। |
| एयरपोर्ट | महाराजा अग्रसेन इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उपयोग करने वाले दिल्ली के यात्रियों के लिए यह ‘फीडर’ का काम करेगा। |
| शिक्षा | दिल्ली के छात्र HAU और GJU जैसी यूनिवर्सिटीज में आसानी से आ-जा सकेंगे। |
चुनौतियां और वर्तमान स्थिति
- फंडिंग और अप्रूवल: RRTS जैसे प्रोजेक्ट्स में भारी निवेश की आवश्यकता होती है। फिलहाल दिल्ली-सराय काले खां से पानीपत और अलवर वाले कॉरिडोर पर काम चल रहा है, जिसके बाद हिसार लाइन को प्राथमिकता मिलने की संभावना है।
- भूमि अधिग्रहण: ट्रैक को सीधा और हाई-स्पीड के अनुकूल बनाने के लिए नई जमीन का अधिग्रहण एक महत्वपूर्ण चरण होगा।
रैपिड रेल और हाई-स्पीड ट्रेनों का आना हिसार के लिए वैसा ही होगा जैसा कभी ‘मेट्रो’ का आना गुरुग्राम के लिए था। यह हिसार को एक “सैटेलाइट टाउन” से बदलकर उत्तर भारत के एक “प्रमुख औद्योगिक और ट्रांसपोर्ट हब” में तब्दील कर देगा।


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